सरसो तेल समेत मूंगफली और सोयाबीन तेल दाम औंधें मुहें गिरा ,यहाँ से खरीदें

दिन पर दिन खाद पदार्थों के दामों में बढ़ रहा है ऐसे में मूंगफली समय सरसों के तेल के भाव में भारी गिरावट देखने को मिला है तो आप लोग भी अगर सस्ते दामों में सरसों का तेल खरीदना चाहते हैं.

तो कुछ ऐसे तरीका बताया जाएगा कि इसके माध्यम से आसानी में सस्ता सरसों का तेल आसानी से खरीद सकते हैं तो चलिए जानते हैं पूरी खबर को विस्तार से कैसे खरीदने हैं.

आचनक पेट्रोल डीजल दे दाम कम होने के बाद अब खाने के बाले तेल का दाम में भी भारी गिरावट देखने को मिल रहा है । सरसो तेल समेत मूंगफली और सोयाबीन तेल की दाम में भारी गिरावट देखने का मिल रहा है.

भारत की राजधानी नई दिल्ली में सरसों की दामों में भी गिरावट देखने को मिला है पहले सरसों की मूल ₹210 था लेकिन अभी इसकी मूल में ₹50 गिरावट देखने को मिला है जो आप लोग 130 से ₹140 में 1 लीटर सरसों का तेल खरीद सकते हैं.

सरसों तेल मूल्य दिल्ली

खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक से खरीदें जिससे और भी काम ₹50 से लेकर ₹100 के बीच में भी ऑफर में खरीद सकते हैं. 

बिहार में अभी वर्तमान में सरसों तेल का मूल्य ₹200 लीटर है लेकिन भारी गिरावट के बाद सरसों तेल का मूल्य भी महज 140 से ₹150 के बीच में ले सकते हैं ऑफलाइन दुकान से आपको ₹200 पड़ सकता है लेकिन अगर ऑनलाइन ऑफर में लेते हैं.

बिहार में सरसों तेल का मूल्य

तो आपको मात्र ₹50 से लेकर ₹100 के बीच में मिल जाएंगे 1 लीटर सरसों तेल ऑनलाइन खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक से खरीद सकते हैं.

बिहार में सरसों तेल का मूल्य

वर्तमान में अभी सरसों तेल का मूल उत्तर प्रदेश में ₹200 है लेकिन भारी गिरावट के बाद सरसों तेल का मूल्य ₹140 प्रति लीटर हो गया है अगर इससे भी ज्यादा सस्ता में खरीदना चाहते हैं.

उत्तर प्रदेश में सरसों तेल का मूल्य

तो आप लोग ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं जिससे आपको ₹100 के अंदर में ही 1 लीटर सरसों तेल मिल जाएंगे खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक से खरीद सकते हैं.

बाजार सूत्रों ने कहा कि इंडोनेशिया द्वारा निर्यात खोले जाने के बाद विदेशों में सूरजमुखी को छोड़कर सोयाबीन, पामोलीन तेलों के दाम में लगभग 100 डॉलर की कमी हुई है. 

इस तरह कम हुए तेल का दाम

ऊंचे दाम पर देश में आयात घटा है और स्थानीय मांग की पूर्ति देशी तेल (सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला और सरसों) से की जा रही है, इसमें सबसे अधिक दबाव सरसों पर है, जो आयातित तेलों से कहीं सस्ता बैठता है, आयातित तेलों की मांग भी नहीं के बराबर है जिससे पिछले साल के मुकाबले इस बार अप्रैल में आयात लगभग 13 प्रतिशत घटा है.